असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने चार अक्टूबर को बताया कि सेना की आवाजाही से जुड़ी जानकारी कथित रूप से पाकिस्तान भेजने के संदेह में राज्य पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि इनमें एक सेवानिवृत्त सैनिक है, जो अब अनुबंध के आधार पर फिर सेना के साथ काम कर रहा था। एनडीटीवी और नॉर्थईस्ट लाइव ने इस घोषणा की खबर दी। सरमा के अपने सार्वजनिक खाते पर भी दो गिरफ्तारियों की जानकारी दी गई। इससे पहले पुलिस ने गुवाहाटी में एक संदिग्ध की गिरफ्तारी का विवरण जारी किया था।

सरमा के अनुसार कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर हुई और आगे की जांच एक केंद्रीय एजेंसी करेगी। उनके सार्वजनिक बयान में इसे अगला कदम बताया गया है। इस रिपोर्ट के लिए देखी गई सामग्री से आरोपियों या मामले का हस्तांतरण पूरा होने की पुष्टि नहीं होती। जांच किस केंद्रीय एजेंसी को मिलेगी, यह भी स्पष्ट नहीं है। आरोपों पर अदालत का कोई निष्कर्ष इन स्रोतों में उपलब्ध नहीं था।

असम पुलिस के पहले विवरण में बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह का नाम बताया गया था। द इकोनॉमिक टाइम्स और जागरण में प्रकाशित पुलिस बयान के अनुसार, विशेष कार्यबल ने तीन और चार अक्टूबर की दरमियानी रात गुवाहाटी के सातगांव इलाके में किराए के मकान से उन्हें पकड़ा। पुलिस के अनुसार बाद में एसटीएफ थाने के मामला संख्या 09/2026 में उनकी गिरफ्तारी की गई। रात का यह अभियान और रविवार को दो गिरफ्तारियों की व्यापक घोषणा, सामने आ रही जानकारी के अलग-अलग चरण हैं।

पुलिस ने बताया कि शुरुआती सूचना तेजपुर में सेना की गजराज मिलिट्री इंटेलिजेंस इकाई से मिली थी। गुवाहाटी में कार्रवाई से पहले असम एसटीएफ ने सोनितपुर पुलिस के साथ मिलकर इस सूचना की आगे जांच की। एनडीटीवी की स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार इस काम में एसटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक पार्थ सारथी महंत और सोनितपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरुण पुरकायस्थ ने समन्वय किया।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि सिंह एक पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव के संपर्क में थे और सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी दे रहे थे। पुलिस ने एक मोबाइल फोन, सिम कार्ड और ऐसे दस्तावेज जब्त करने की बात कही है जिन्हें उसने आरोपों से जुड़ा बताया। यह जांचकर्ताओं का विवरण है। देखी गई सामग्री में मूल बातचीत, जब्त दस्तावेज और फॉरेंसिक जांच का आकलन उपलब्ध नहीं था। केवल बरामदगी की सूचना से आरोप सिद्ध नहीं हो जाता।

पीटीआई की जानकारी के साथ प्रकाशित जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन निजी संबंध बनाकर दोनों से जानकारी हासिल की गई। समीक्षा की गई रिपोर्टों से दूसरे व्यक्ति की पहचान या दोनों में से किसका सेवानिवृत्त सैनिक होना स्पष्ट नहीं होता। इसलिए इस रिपोर्ट में सिंह को सेवानिवृत्त सैनिक नहीं बताया गया है। मुख्यमंत्री की बताई दो गिरफ्तारियों के अतिरिक्त तीसरी गिरफ्तारी भी नहीं जोड़ी गई है।

देखे गए स्रोतों में मूल प्राथमिकी, गिरफ्तारी और रिमांड के दस्तावेज तथा किसी भी आरोपी या उनके वकीलों का पक्ष उपलब्ध नहीं था। मुख्यमंत्री की चार अक्टूबर की मूल सार्वजनिक पोस्ट प्राप्त की गई है, जबकि पुलिस बयान का विवरण यहां समाचार रिपोर्टों के जरिए मिला है। आगे की जांच जारी है। किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।