उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने चार अक्टूबर को उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी। प्रस्ताव के तहत उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 की जगह राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और जल प्रबंधन की जरूरतों के अनुरूप नया कानून लाया जाना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में बैठक की अध्यक्षता की। राज्य के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने बैठक की पुष्टि की। हिन्दुस्तान में प्रकाशित भाषा की रिपोर्ट और देवभूमि मीडिया के विस्तृत विवरण में विधेयक विधानसभा में रखने की मंजूरी का उल्लेख है।

जागरण की संवाददाता रिपोर्ट में प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नहर निर्माण, जल प्रबंधन, पानी के अनधिकृत इस्तेमाल और नहरों को नुकसान पहुंचाने जैसे विषय बताए गए हैं। समीक्षा की गई सामग्री में विधेयक का मूल पाठ उपलब्ध नहीं था। इसलिए जुर्माने, दंड या दूरी पर आधारित प्रतिबंधों का विवरण यहां तय नियमों के रूप में नहीं दिया गया है।

अभी सत्यापित कदम एक विधायी प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलना है। इन रिपोर्टों से विधानसभा में पारित होने, स्वीकृति मिलने या कानून लागू होने की पुष्टि नहीं होती। किसानों और दूसरे जल उपयोगकर्ताओं को इस घोषणा का अर्थ यह नहीं लेना चाहिए कि पुराना कानून पहले ही बदल चुका है।