लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन ने दो अक्टूबर को निर्वाचन आयोग की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पड़ताल के लिए पांच पूर्व न्यायाधीशों का आयोग घोषित किया। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर इसकी अध्यक्षता करेंगे। द वायर और लॉचक्र ने उसी शाम घोषणा की जानकारी दी।

संगठन के अनुसार पैनल पुनरीक्षण के कानूनी आधार, प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं पर उसके प्रभाव की जांच करेगा। देशभर में जनसुनवाई करके प्रभावित नागरिकों, नागरिक संगठनों और विशेषज्ञों की बात सुनने की योजना है। रिपोर्ट दिसंबर 2026 तक देने का लक्ष्य है; यह प्रस्तावित समयसीमा है, पूरी हो चुकी जांच नहीं।

यह निजी पहल है, कानून के तहत गठित सरकारी जांच आयोग नहीं। इसका गठन अदालत का फैसला नहीं है और अभी कोई निष्कर्ष जारी नहीं हुआ है। लॉचक्र के अनुसार निर्वाचन आयोग ने पैनल के गठन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। मतदाता पुनरीक्षण का निर्वाचन आयोग का घोषित उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में रखना और अपात्र प्रविष्टियां हटाना है। यह उद्देश्य कितना पूरा हुआ, पैनल इसकी पड़ताल करना चाहता है।