एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दो अक्टूबर को मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों की आलोचना की। भारतीय बोर्ड के अध्यक्ष आकार पटेल ने शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा और केवल इस अधिकार का इस्तेमाल करने के कारण हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की। यह संगठन का आकलन है, किसी विशेष हिरासत को अवैध ठहराने वाला अदालती फैसला नहीं।

दिल्ली और मुंबई में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों के बाद यह बयान आया। कॉमन ड्रीम्स ने भी एमनेस्टी के हस्तक्षेप की खबर दी। इंडियन एक्सप्रेस की तीन अक्टूबर की लाइव कवरेज के अनुसार दिल्ली में हिरासत में लिए गए लोगों को शुक्रवार शाम तक छोड़ दिया गया था। इसलिए बयान में की गई रिहाई की मांग का अर्थ यह नहीं है कि वे लोग अभी भी हिरासत में हैं।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाताओं की पात्रता जांचना है और उसने राजनीतिक हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। प्रदर्शनकारी प्रक्रिया और उसके असर पर सवाल उठा रहे हैं। एमनेस्टी का नया बयान शांतिपूर्ण असहमति पर प्रशासन की प्रतिक्रिया से जुड़ा है। यह मतदाता सूची की त्रुटियों पर विवाद का निपटारा नहीं करता और हर नाम हटाए जाने को गलत साबित नहीं करता।