महाराष्ट्र ने राज्य में बारिश की कमी और लंबे शुष्क दौर के बाद 26 सितंबर को 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया। सरकार ने जून से 18 सितंबर तक बारिश में 18.8 प्रतिशत की कमी बताई और कहा कि प्रभावित तालुके 32 जिलों में फैले हैं। इस घोषणा से राहत उपायों के लिए क्षेत्र चिह्नित हुए हैं; इसका अर्थ यह नहीं कि उन सभी क्षेत्रों के हर खेत या परिवार को एक जैसी हानि हुई है।

तत्काल पैकेज में फसल ऋणों का पुनर्गठन, कृषि-संबंधी ऋण की वसूली टालना, भू-राजस्व में रियायत और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत शामिल है। इसमें स्कूल और कॉलेज की परीक्षा फीस माफ करने, ग्रामीण रोजगार के नियमों में ढील, जहां जरूरत हो वहां पीने के पानी के टैंकर तथा अनाज और चारे की व्यवस्था का भी प्रावधान है। ये उपाय अलग-अलग गांवों और परिवारों तक कितनी जल्दी पहुंचेंगे, यह अभी उनके क्रियान्वयन पर निर्भर है।

जिला कलेक्टरों को खेतों में फसल क्षति का आकलन कर तस्वीरों और GPS निर्देशांकों के साथ रिपोर्ट देने को कहा गया है। राज्य ने कहा कि इन आकलनों के बाद फसल नुकसान पर आर्थिक सहायता का अलग आदेश जारी होगा। 26 सितंबर की घोषणा ने हर प्रभावित किसान के लिए एक समान नकद मुआवजा तय नहीं किया; सूखा प्रभावित क्षेत्र में होना ही किसी किसान की देय व्यक्तिगत हानि सिद्ध नहीं करता।

प्रभावित तालुके सभी छह राजस्व संभागों में फैले हैं, जिनमें मराठवाड़ा, विदर्भ, पश्चिमी महाराष्ट्र और कोंकण के हिस्से शामिल हैं। इस फैलाव के कारण पीने का पानी, पशुओं का चारा, खेती का कर्ज और अगली फसल की तैयारी अलग-अलग व्यावहारिक चिंताएं हैं। सरकार ने स्थानीय प्रशासन को क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वेक्षण करते हुए जलापूर्ति और राहत की योजना बनाने को कहा है।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने घोषणा में तुरंत पर्याप्त नकद सहायता नहीं होने की आलोचना की और जल्द भुगतान तथा अगली बुवाई के लिए मदद मांगी। यह विपक्ष की मांग है, राज्य द्वारा वास्तव में आदेशित राहत से अलग। अब जांचने योग्य कदम जिला सर्वेक्षण के निष्कर्ष, राज्य का वादा किया गया मुआवजा आदेश और प्रभावित समुदायों तक घोषित सेवाएं पहुंचने के प्रमाण हैं।