पुणे की विशेष मकोका अदालत ने 29 सितंबर को 2020 के एक रंगदारी मामले में निलेश घायवळ और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। मराठी जागरण और नवराष्ट्र ने उसी दोपहर फैसले की खबर दी। द पायनियर की 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, छह लोग बरी हुए।

अभियोजन का आरोप था कि जब घायवळ दूसरे मामले में जेल में था, तब एक रैली के लिए जीप की मांग की गई। मराठी जागरण के अनुसार, जांचकर्ताओं ने घायवळ पर निर्देश देने का आरोप लगाया था, लेकिन मुकदमे में आरोप साबित नहीं हुए।

नवराष्ट्र ने बताया कि शिकायतकर्ता पुलिस के दबाव का दावा करते हुए अपने मूल आरोपों से पीछे हट गया। अन्य गवाहों ने भी अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। पुलिस दबाव की बात शिकायतकर्ता का आरोप है; इस रिपोर्ट ने पुलिस के कदाचार की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।

बरी करने का यह फैसला 2020 के इसी मामले तक सीमित है। खबरों में घायवळ से जुड़े अलग मामलों का भी उल्लेख है; इससे उनका समाप्त होना साबित नहीं होता। समीक्षा की गई सामग्री में हस्ताक्षरित फैसला या अपील पर अभियोजन का निर्णय उपलब्ध नहीं था।