बेंगलुरु के रमन अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक प्रकाशीय प्रयोग में लगभग 1.17 की क्वांटम मात्रा मापने की जानकारी दी। 24 सितंबर को प्रकाशित अध्ययन क्वांटम मेजर थ्योरी नामक दृष्टिकोण को कई संभावित रास्तों से गुजरने वाले प्रकाश के मापन से जोड़ता है।
दल ने प्रकाश के ध्रुवण से रास्तों के एक समूह को अलग पहचाना और चुना, फिर पहचान देने वाली जानकारी हटा दी ताकि रास्तों के बीच व्यतिकरण हो सके। आने और निकलने वाली लेजर शक्ति के मापन तथा अंशांकित फिल्टर से शोधकर्ता उस समूह का क्वांटम माप निकाल सके।
मान एक से अधिक है क्योंकि माप में रास्तों के बीच व्यतिकरण शामिल है। इसका अर्थ किसी घटना की संभावना 100 प्रतिशत से ऊपर होना नहीं है: सामान्य पहचान-प्रायिकता अपनी सामान्य सीमाओं के भीतर रहती है। प्रयोग क्वांटम इतिहासों के पूरे समूहों को जांचने का तरीका बनाता है, जिसके भविष्य में मापन और सूचना प्रसंस्करण में संभावित उपयोग हैं।