राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में चार अक्टूबर को संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से तैयार दो नर गोडावण छोड़े गए। इसके साथ तैयारी का चरण पार कर कार्यक्रम निगरानी वाले मैदानी परीक्षण में पहुंचा। पर्यावरण मंत्रालय ने सुबह 11 बजकर 33 मिनट की विज्ञप्ति में जैसलमेर के सम क्षेत्र में सुबह हुए इस कदम की पुष्टि की।
यह तीन अक्टूबर को पक्षियों को प्राकृतिक आवास के अनुकूल बनाने वाले एवियरी के उद्घाटन के बाद की नई कार्रवाई है। उस दिन पक्षियों को अगले दिन छोड़ने की योजना बताई गई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की चार अक्टूबर की रिपोर्ट और एएनआई से अधिकारियों की बातचीत के अनुसार, दोनों पक्षियों को ऐसे बाड़े में छोड़ा गया जहां मानवीय पहुंच सीमित रखी जाती है, ताकि उन्हें कम से कम व्यवधान हो।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक गोबिंद सागर भारद्वाज ने एएनआई को बताया कि निगरानी के लिए पक्षियों को टैग लगाए गए हैं। वैज्ञानिक उनकी आवाजाही, भोजन और नए वातावरण के अनुकूल ढलने पर नजर रखेंगे। नतीजों के आधार पर आगे और पक्षी छोड़ने की प्रक्रिया तय होगी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इन दो नर पक्षियों की निगरानी को तत्काल प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान शामिल हैं। गंभीर रूप से संकटग्रस्त इस प्रजाति के संरक्षण में यह महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि इससे जंगल में लंबे समय तक जीवित रहने या सफल प्रजनन की पुष्टि नहीं होती। इन परिणामों का आकलन अभी बाकी है।
