मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने 29 सितंबर को बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को 2021 के एंटीलिया विस्फोटक प्रकरण और मनसुख हिरेन हत्या मामले में जमानत दी। लाइव लॉ पर प्रकाशित हस्ताक्षरित आदेश में जमानत पर विचार करते समय यूएपीए के आतंकवादी कृत्य संबंधी आरोप के आधार पर सवाल उठाए गए हैं। अभियोजन को अपना मामला साबित करने का अवसर बना रहेगा।
अदालत ने एक लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का स्थानीय सक्षम जमानतदार मांगा है। प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी होने तक वाझे मुकदमे की सुनवाई के अलावा बृहन्मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में प्रवेश या निवास नहीं कर सकते। आदेश में पासपोर्ट जमा करने, हर सप्ताह स्थानीय थाने में हाजिरी और गवाहों से संपर्क न करने की शर्तें भी हैं।
एनआईए ने गवाहों को डराने, साक्ष्यों में हस्तक्षेप और फरार होने की आशंका जताते हुए जमानत का विरोध किया। इंडियन एक्सप्रेस और फ्री प्रेस जर्नल ने 29 सितंबर को बताया कि विशेष अदालत ने अपने आदेश पर रोक की एजेंसी की मांग खारिज कर दी। उसी रात मिड-डे ने बताया कि एनआईए बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंची, जहां उस दोपहर तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।
एनडीटीवी मराठी ने भी 29 सितंबर को हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने की खबर दी। उसी रात एनडीटीवी पर प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट में वाझे के वकील ने रिहाई की औपचारिकताएं चलने की बात कही। 30 सितंबर की सुबह की जांच तक वास्तविक रिहाई या हाई कोर्ट के किसी बाद के स्थगन आदेश की पुष्टि नहीं हुई थी। जमानत का निर्णय दोष तय नहीं करता और इससे आरोप समाप्त नहीं होते।
