दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने 30 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के महिला कॉलेजों की प्राचार्यों के साथ बैठक की। उन्होंने कॉलेज परिसरों और वहां आने-जाने के रास्तों की सुरक्षा सुधारने के निर्देश दिए। बैठक में कुलपति, पुलिस तथा नगर निकाय और परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। निर्देश बुनियादी सुविधाओं, पुलिस व्यवस्था और आवाजाही से जुड़े हैं; उपलब्ध रिपोर्टें इन कामों के पूरा हो जाने की पुष्टि नहीं करतीं।

प्राचार्यों ने अंधेरे रास्तों, फुटपाथों पर अवरोध, असुरक्षित पार्कों और कॉलेज के प्रवेश द्वार रोकने वाले परिवहन संचालकों की समस्या बताई। द स्टेट्समैन के अनुसार कॉलेजों और मेट्रो स्टेशनों के पास गश्त बढ़ाने, पिंक बूथों में प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात करने और हर कॉलेज के लिए पुलिस संपर्क अधिकारी तय करने के निर्देश दिए गए। आने-जाने के रास्तों और बस स्टॉप पर रोशनी तथा सीसीटीवी बेहतर करने को भी कहा गया।

आकाशवाणी के अनुसार परिवहन विभाग को छात्रों की यात्रा के अंतिम हिस्से के लिए बेहतर साधन उपलब्ध कराने और ई-रिक्शा को विनियमित करने को कहा गया। छात्र सुरक्षा ऐप और महिला कॉलेजों को जोड़ने वाली समिति का प्रस्ताव भी रखा गया। प्रगति की समीक्षा हर पखवाड़े होनी है। ये घोषित उपाय हैं; इनके लागू होने और रोजमर्रा की आवाजाही पर असर का आकलन अभी बाकी है।

अलग से एएनआई ने 30 सितंबर को दिल्ली सचिवालय के पास एसएफआई के प्रदर्शन की खबर दी। आयोजकों ने 11 सूत्रीय मांगपत्र बताया, जिसे एक प्रदर्शनकारी ने सौंप दिए जाने की बात कही। प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदियों का विरोध किया और यौन हिंसा पर जवाबदेही मांगी। रिपोर्ट में मांगपत्र पर आधिकारिक जवाब या उसका पूरा पाठ शामिल नहीं था।

इन घटनाक्रमों से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। आईएएनएस के हवाले से द स्टेट्समैन की अलग रिपोर्ट ने कला संकाय और नॉर्थ कैंपस के बड़े प्रदर्शन की तारीख 28 सितंबर बताई। कई महिला कॉलेजों के छात्रों ने सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों और आवाजाही की स्वतंत्रता की मांग की थी। उस पुराने मार्च को 30 सितंबर के सचिवालय प्रदर्शन और प्रशासनिक बैठक से अलग समझना जरूरी है।