सुप्रीम कोर्ट ने तहसीन पूनावाला की याचिकाओं में 17 जुलाई 2018 को देशव्यापी लिंचिंग-रोधी निर्देश दिए। याचिकाओं ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा और सुरक्षा की विफलताओं को अदालत के सामने रखा। ये सुरक्षा उपाय मुस्लिम पीड़ितों समेत सभी समुदायों पर लागू हैं।

घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।
घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।

अदालत ने जिला स्तर पर वरिष्ठ पुलिस नोडल अधिकारी और भीड़ की हिंसा रोकने के उपाय जरूरी बताए। पीड़ित मुआवजा योजनाओं तथा जानबूझकर लापरवाही या कदाचार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के भी निर्देश दिए।

दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।
दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।

इन निर्देशों से अधिकारियों के दायित्व और उनके जवाब की समीक्षा का आधार मिलता है। ये हर राज्य के पालन का प्रमाण या किसी खास हमलावर पर आपराधिक फैसला नहीं हैं। रिपोर्टिंग में रोकथाम, जांच, मुआवजा और अभियोजन की अलग पुष्टि जरूरी है; राष्ट्रीय आदेश होना अपने आप न्याय मिल जाना नहीं है।