पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चार अक्टूबर को कोलकाता में विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए छह महीने और मांगे। इंडियन एक्सप्रेस ने इस नई समयसीमा की जानकारी दी। अशोक सिंघल के जन्मशती कार्यक्रम में दिए गए भाषण को प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने भी अलग से रिपोर्ट किया। प्रस्तावित संहिता शादी, तलाक और विरासत जैसे नागरिक विषयों से जुड़ी है।

अधिकारी ने कहा कि इसके बाद धर्मांतरण और उन विषयों पर कानून लाए जाएंगे जिन्हें उन्होंने “लव जिहाद” और “लैंड जिहाद” कहा। ये उनके राजनीतिक शब्द हैं, किसी साजिश को साबित करने वाले निष्कर्ष नहीं। उन्होंने संविधान के दायरे में काम करने और पूजा स्थलों की सुरक्षा की बात भी कही। उपलब्ध रिपोर्टों में इन प्रस्तावित उपायों का अंतिम विधायी पाठ, नया मतदान या लागू करने की अधिसूचना नहीं दी गई है।

ये भाजपा के पहले से किए गए चुनावी वादे हैं। उनतीस जून को इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति की घोषणा की और अगस्त में यूसीसी विधेयक लाने की बात कही थी। चार अक्टूबर का घटनाक्रम समयसीमा का दोबारा ऐलान है; समिति का गठन या प्रस्ताव की शुरुआत उस दिन नहीं हुई।

जून की रिपोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य उज्मा आलम की यह चिंता भी दर्ज थी कि यूसीसी से अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हो सकता है। यह पुराना विरोध है, रविवार के भाषण की प्रतिक्रिया नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में नई समयसीमा पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली।