शाही मस्जिद के पास झड़पों के मामले में आरोपी नौ लोगों की 30 सितंबर को उज्जैन के जिला अस्पताल में मेडिकल जांच हुई। मस्जिद के आसपास पुलिस की तैनाती जारी रही। एएनआई ने चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र शर्मा के हवाले से बताया कि इन नौ लोगों में बाहरी चोट नहीं मिली। उनके व्यक्तिगत मेडिकल रिकॉर्ड स्वतंत्र समीक्षा के लिए उपलब्ध नहीं थे।
यह जांच सिंहस्थ से पहले सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने को लेकर 28 सितंबर को हुए टकराव के बाद हुई। पथराव की खबरों के बाद पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया था। डॉक्टर का बयान केवल 30 सितंबर को जांचे गए लोगों तक सीमित है; इससे पहले हुई घटना में मौजूद हर व्यक्ति की स्थिति का पता नहीं चलता।
द स्टेट्समैन के अनुसार, समाजवादी पार्टी के सचिव सुफियान अली कुरैशी ने 30 सितंबर को अलग बयान में पूछा कि मस्जिद का हिस्सा हटाने पर बातचीत के बावजूद स्थिति लाठीचार्ज और आंसू गैस तक क्यों पहुंची। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। यह कार्रवाई पर उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है, किसी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष नहीं।
जिला अधिकारियों ने मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्रवाई को बातचीत से तय कदम बताया है और कहा है कि मस्जिद समिति यह काम कर रही है। पूरी मस्जिद नहीं गिराई गई। मेडिकल जांच की नई जानकारी के बाद भी पुलिस बल के इस्तेमाल की जरूरत और घटनास्थल पर लोगों के साथ व्यवहार से जुड़े व्यापक सवाल अनसुलझे हैं।
