उज्जैन की शाही मस्जिद के पास 28 सितंबर को हुए टकराव के मामले में नौ आरोपियों को 30 सितंबर को जिला अदालत में पेश किए जाने के बाद 12 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। लाइव हिन्दुस्तान और नईदुनिया ने यह जानकारी दी। मामला सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान कथित पथराव और उपद्रव से जुड़ा है।

अदालत में पेशी से पहले मेडिकल जांच हुई थी, जिसका विवरण असल सच की पिछली रिपोर्ट में दिया गया था। नवभारत टाइम्स ने भी स्वतंत्र रूप से बताया कि नौ आरोपियों को जांच के लिए ले जाने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेजने का आदेश हुआ। रिमांड का मूल आदेश समीक्षा के लिए उपलब्ध नहीं था। प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की अदालती परख अभी बाकी है।

बुधवार शाम नईदुनिया ने बताया कि मजदूरों ने मस्जिद के अगले हिस्से के दो गुंबद और मीनार का ऊपरी भाग हटा दिया। रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन के साथ समझौते के तहत मस्जिद प्रबंध कमेटी द्वारा लगाए गए मजदूर मचान की मदद से चरणबद्ध काम कर रहे थे। यह मस्जिद के कुछ हिस्सों को हटाने का अगला चरण था, पूरी इमारत को गिराना नहीं।

प्रशासन सड़क परियोजना को सिंहस्थ 2028 से जोड़ता है। एनडीटीवी की 30 सितंबर की रिपोर्ट में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के पहले दिए विवरण का उल्लेख है। उनके अनुसार समिति के साथ समझौते में प्रभावित दुकानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, लागू नियमों के अनुसार मुआवजा और परिसर के भीतर मीनार को दूसरी जगह स्थापित करना शामिल है। इन आश्वासनों से यह साबित नहीं होता कि मुआवजा दिया जा चुका है या मीनार का स्थानांतरण पूरा हो गया है।